क्षदा एकादशी 2025 व्रत विधि और महत्व"
तो मेरे दोस्तों, आज मैं आपको बताने वाला हूँ साल की सबसे खास एकादशी के बारे में – मोक्षदा एकादशी। ये 1 दिसंबर 2025 को आ रही है और मुझे बताना है की ये मेरी personally सबसे पसंदीदा एकादशी है। क्यों? क्युकी इस दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भगवद गीता का ज्ञान दिया था।
मेरी दादी माँ हमेशा कहती थी – “बेटा, अगर साल में एक ही एकादशी का व्रत रख सको तो मोक्षदा एकादशी जरूर रखना!” और सच बताऊं तो पहले मुझे भी नहीं पता था की ये इतनी खास क्यों है। लेकिन जब मने ठीक से इसके बारे में जाना और खुद व्रत रखा, तब समझ आया की इसमें क्या बात है। तो चलो मई तुम्हे बताता हु।

मोक्षदा एकादशी क्या है और क्यों है खास?
मोक्षदा शब्द का मतलब ही है मोक्ष देने वाली। ये मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी है और इसे कई नामों से जाना जाता है। South India में इसे वैकुंठ एकादशी या मुक्कोटि एकादशी भी कहते हैं। सबसे रोचक बात ये है की इसे गीता एकादशी भी कहते हैं क्युकी इसी दिन महाभारत के कुरुक्षेत्र युद्ध में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। 📖
हमारे धर्मग्रंथों के हिसाब से इस दिन वैकुंठ के दरवाजे खुल जाते हैं। मेरी दादी माँ कहती थी की इस दिन जो भी सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसको मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन सबसे हैरानी वाली बात जो मुझे लगती है वो ये है की शास्त्रों में लिखा है की पूरे साल में जितनी भी तेईस-चौबीस एकादशी आती हैं, उन सब का मिला-जुला फल इस एक मोक्षदा एकादशी को रखने से मिल जाता है। मतलब अगर तुमने साल भर कोई एकादशी नहीं रखी, कोई बात नहीं, बस इस एक व्रत को ठीक से रख लो।
और एक बात जो मुझे बहुत दिल को छूने वाली लगती है वो ये है की इस व्रत का फल सिर्फ हमारे लिए नहीं बल्कि हमारे पूर्वजों के लिए भी काम करता है।
राजा वैखानस की कहानी – इस व्रत की ताकत 💪जो तुम्हे पता होनी चाहिए :
चलो अब मैं तुम्हे वो कहानी बताता हूँ जो मेरी दादी माँ मुझे सुनाती थी। बहुत समय पहले चम्पक नगर में राजा वैखानस नाम के एक बहुत ही धर्मी और नेक राजा रहते थे। एक रात राजा को एक डरावना सपना आया। उन्होंने देखा की उनके पिता नरक में बहुत तकलीफ झेल रहे हैं। राजा डर के मारे पसीने-पसीने हो गए और नींद से उठ गए। 😰
राजा सो नहीं पाए पूरी रात। सुबह होते ही वो बहुत परेशान थे। वो इतने दुखी थे की राज्य का कोई भी काम अच्छे से नहीं कर पा रहे थे। तब उनके मंत्रियों ने कहा की आप किसी बड़े ऋषि से मिलो।
राजा फौरन निकल पड़े और उनकी मुलाकात हुई पर्वत ऋषि से। पर्वत ऋषि बहुत बड़े ज्ञानी थे। राजा ने रो-रोकर अपनी पूरी परेशानी बताई। पर्वत ऋषि ने अपनी शक्तियों से पूरी बात देखी और बताया – “तुम्हारे पिताजी पिछले जन्म में अपनी पत्नी को बहुत सताते थे। इसी पाप की वजह से वो नरक में हैं।”
राजा ने पूछा – “क्या कोई रास्ता है?” पर्वत ऋषि बोले – “हाँ! मोक्षदा एकादशी का व्रत रखो और इस व्रत का पूरा फल अपने पिताजी को समर्पित कर देना।”
राजा ने पूरी तैयारी के साथ व्रत रखा। सुबह जल्दी उठकर स्नान किया, भगवान विष्णु की पूजा की, पूरे दिन व्रत रखा, रात भर जाप किया, और प्रार्थना की – “हे भगवान, इस व्रत का पूरा फल मैं अपने पिताजी को देता हूँ!”
और फिर चमत्कार हुआ! उसी रात राजा ने देखा की उनके पिताजी देवताओं जैसे कपड़े पहने हुए हैं और एक दिव्य रथ में बैठकर वैकुंठ जा रहे हैं! उनके पिताजी ने आशीर्वाद दिया – “बेटा, तुमने मुझे नरक से निकाल दिया!”
मुझे ये कहानी बहुत पसंद है क्युकी ये बताती है की हम अपने पूर्वजों के लिए भी आध्यात्मिक तौर पर कुछ कर सकते हैं।
पूजा विधि – कैसे करें व्रत 🕉️ सबसे आसान तरीका :
ये हैइस व्रत का जरूरी हिस्सा की हम क्या करें इस दिन। मैं तुम्हे अपना तरीका बताता हूँ जो मने दादी माँ से सीखा है।
सुबह की तैयारी:
सबसे पहले सुबह जल्दी उठो, सूरज निकलने से पहले। फिर नहा लो और साफ कपड़े पहनो। पीले या सफेद रंग के कपड़े अच्छे रहते हैं। भगवान विष्णु या कृष्ण की मूर्ति के सामने दीया जलाओ।
संकल्प और पूजा:
तुलसी के पौधे के सामने खड़े होकर बोलो – “मैं आज मोक्षदा एकादशी का व्रत रख रहा हूँ।” फिर भगवान को चढ़ाओ:
- तुलसी के पांच-सात पत्ते 🌿
- पीले फूल, गेंदा के फूल 🌼
- केला, सेब, संतरा 🍌
- नारियल अगर हो सके
- दूध, दही या पंचामृत
गीता की किताब को भी साफ करके अच्छी जगह रखो और फूल चढ़ाओ। फिर कम से कम एक सौ आठ बार “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र बोलो। माला का इस्तेमाल कर सकते हो गिनती के लिए। इसके बाद कथा सुनो और आरती करो। मैं गीता के कुछ श्लोक भी पढ़ता हूँ।
पूरे दिन का ध्यान:
पूरे दिन अच्छे विचार रखना जरूरी है। मेरी माँ कहती थी – “व्रत सिर्फ पेट का नहीं, दिमाग का भी होता है!” झूठ मत बोलो, लड़ाई मत करो, गुस्सा काबू में रखो। शाम को मंदिर जाओ अगर हो सके। रात को भजन सुनो। 🎵
व्रत में क्या खाएं क्या नहीं 🍽️
दो तरह के व्रत होते हैं। पहला निर्जला जिसमें कुछ नहीं खाते, सिर्फ पानी पीते हैं। दूसरा फलाहार जो आम है।
खा सकते हो: फल (केला, सेब, संतरा, अंगूर), दूध वाली चीजें (दूध, दही, पनीर), व्रत के खाने (आलू, साबूदाना, मखाना, कुट्टू), पीने की चीजें (नारियल पानी, लस्सी, जूस), मीठा (शहद, गुड़)।
बिल्कुल नहीं खाना: ❌ अनाज (चावल, गेहूं), दालें, प्याज-लहसुन, मांस-मछली, अंडे, तेज मसाले।
मैं क्या खाता हूँ? सुबह दूध और केला, दोपहर में फलों की चाट या आलू की सब्जी, शाम को चाय और मखाना, रात को साबूदाना खिचड़ी। पानी खूब पीना है। 💧
फायदे जो मिलते हैं
इस व्रत के बहुत फायदे हैं। आध्यात्मिक तौर पर मोक्ष का रास्ता मिलता है, भगवान के नजदीक जाते हो, मन को शांति मिलती है। मने खुद महसूस किया है की पूरा दिन सुकून रहता है। पिछले पापों का नाश होता है और पूर्वजों को भी शांति मिलती है।
रोजमर्रा की जिंदगी में रुकावटें कम होती हैं, नौकरी में तरक्की होती है, कामयाबी मिलती है। घर में झगड़े कम होते हैं, रिश्तों में सुधार होता है। मानसिक तौर पर दिमाग साफ होता है, फैसले आसान हो जाते हैं, धैर्य बढ़ता है, गुस्सा काबू में रहता है। शारीरिक रूप से भी शरीर साफ होता है, पेट को आराम मिलता है।
मेरा अनुभव :
पहली बार जब मने मोक्षदा एकादशी का व्रत रखा था, मैं कॉलेज में था। मुझे लग रहा था – “ये सब काम करता भी है?” लेकिन फिर सोचा की चलो try करते हैं।
मने ठीक से व्रत रखा। पहले दिन थोड़ा मुश्किल लगा, भूख लगी। लेकिन जब शाम को मंदिर गया और वहां का माहौल देखा – भजन, गीता पाठ – तो अलग ही अहसास हुआ। रात को बहुत अच्छी नींद आई। अगले दिन ऐसा लगा जैसे कुछ बड़ा हासिल किया है।
व्रत के कुछ हफ़्तों बाद जिंदगी में अच्छे बदलाव होने लगे। कॉलेज में ध्यान बढ़ गया, परीक्षा में अच्छे नंबर आए, परिवार के साथ रिश्ते सुधर गए। पूरी तरह से शांति महसूस होने लगी। अब हर साल मैं ये व्रत जरूर रखता हूँ।
आखिर में – मेरी गुजारिश
तो दोस्तों, मने तुम्हे मोक्षदा एकादशी के बारे में सब बता दिया। मेरी अनुरोध है की इस साल 1 दिसंबर को इस खास एकादशी का व्रत जरूर करो। भले ही पूरा निर्जला व्रत ना रख सको, कम से कम फलाहार तो रखो।
मुझे यकीन है की अगर तुमने सच्चे मन से ये व्रत रखा तो जिंदगी में अच्छे बदलाव जरूर आएंगे। हो सकता है तुरंत ना दिखे, लेकिन धीरे-धीरे महसूस होगा। याद रखो – भगवान तुम्हारी कोशिश देखते हैं, पूर्णता नहीं।
मोक्षदा एकादशी तुम्हे मोक्ष की ओर ले जाए और तुम्हारी सभी मनोकामनाएं पूरी हों।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे। राधे राधे।
नोट: दिसंबर 2025 में तीन एकादशी हैं – मोक्षदा (1 Dec), सफला (15 Dec), और पुत्रदा (30 Dec)। सभी खास हैं लेकिन मोक्षदा सबसे असरदार है! 📅
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